Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
डॉ० सीमा विजयवर्गीय की ग़ज़लें

अर्जुन की मछली-सा तू है, मेरी नज़रें  बस  तुझ  पर
बाक़ी   सारी   दुनियादारी,  मंज़िल,   रस्ते  सब  तेरे

मृदुल तिवारी की ग़ज़लें

कामयाबी तो मिली  हमको  मगर  इस  दौर  में 
क्या कहें कितना रहे हम  बेख़़बर  इस  दौर  में 
 
जंगलों की   वहशतें  जब  से  नगर में  आ  गईं 
दूर हमसे हो गया जंगल  का  डर  इस  दौर  में 

अंसार क़ंबरी की ग़ज़लें

हम इधर भी रहे हम  उधर  भी  रहे
जानते  भी   रहे   बेख़बर   भी  रहे
 
ज़िंदगी तो  रही  क़ैदियों  की तरह
बाज़ुओं पर मगर बालो-पर भी रहे

नवीन सी० चतुर्वेदी की ग़ज़लें

जाल में किसी को जब तुम तड़पता देखोगे
और बचा न पाओगे तब हृदय द्रवित होगा