Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
मानसिक स्वास्थ्य: एक टैबू- डॉ० दीप्ति तिवारी 

आजकल की दौड़ भाग भरी जिंदगी में लोगों के सामने काफी नए और अनोखे मसले आने लगे हैं युवा अपने काम और घर के मध्य थक हार रहे हैं। घरों से दूर बड़े शहरों में सारा दिन काम करके उनमें घर संभालने की हिम्मत कहाँ ही रह जाएगी। छोटे-छोटे बच्चे पढ़ाई के बोझ के तले दबे रहते हैं। 

फेसबुक की बतकही: आखिर क्यों?- डॉ०मीनू अग्रवाल

एक लघु कथा पढ़ी ,जिसमें एक कुत्ता उस सुरक्षाकर्मी की टाँग दबोच कर रखता है जिसने कैंपस में रहने वाली बच्ची से अनैतिक हरकत करनी चाही ।
बहुत संदेशात्मक कहानी लगी और अन्य पाठकों की तरह मेरा मन भी उस जानवर के प्रति कृतज्ञ हो गया और इंसान के विरुद्ध हो गया।

सशक्त महिला : विकसित समाज का आधार- डॉ० दीप्ति तिवारी

महिलाएँ हमारे समाज की आधी आबादी हैं और कहीं न कहीं समाज के नैतिक मूल्यों को सँजो कर रखना उन्ही के हाथों में होता है l इसका कारण यह है कि एक महिला माँ के रूप में अपने बच्चों को जो गुण और नैतिकता सिखाती है, बड़े होने पर वो बच्चे उन्ही गुणों और नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में उतारते हैं l और इन्ही वैयक्तिक गुणों और मूल्यों से हमारे सामाजिक मूल्यों का निर्धारण होता है l अतः यह स्पष्ट है कि जिस समाज में महिला सशक्त और समझदार होगी उसी समाज में खुशहाली और विकास होगाl

प्रेम संबंध में असफलता : एक अनुभव और सीख- डॉ० दीप्ति तिवारी

प्रेम एक अद्भुत भावना है, जो व्यक्ति के जीवन को खुशी और आनंद से भर देती है। यह प्रेम किन्ही भी दो व्यक्तियों के बीच में हो सकता है और हर स्थिति में यह प्रेमपूर्ण सम्बन्ध व्यक्ति के जीवन को, और उसकी मनःस्थिति को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। इसके विपरीत जब भी इस तरह के संबंधों में दूरियाँ आने लगती हैं, या फिर यह सम्बन्ध टूट जाता है तो यह उस व्यक्ति के लिए दुख, अकेलापन और निराशा का कारण बन सकता है।