Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
अल्का 'शरर' पाँच की ग़ज़लें

हिसार-ए-ज़ात से बाहर कभी गर मैं निकल पाती
तो अपने जिस्म से कुछ रूह का हिस्सा बदलती मैं

असलम राशिद की पाँच ग़ज़लें

बिछड़े थे जिसकी वजह से सीता से राम जी
मैं उस हिरन को राम कहानी से खींच लूँ

विज्ञान व्रत की ग़ज़लें

एक ज़रा-सी ग़लती पर
दुनिया-भर के जुर्माने

गोविन्द गुलशन की ग़ज़लें

मलते   रहेंगे  हाथ  करेंगे   मलाल   सब
ख़ाली निकल के आएँगे पानी से जाल सब