Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
सत्यशील राम त्रिपाठी की ग़ज़लें

लील  जाती हैं सड़क पगडंडियाँ
काश पगडंडी भी सड़कों पर चढ़े

इक़रा अम्बर की ग़ज़लें

परिंदों ने मुझे अपना लिया है
लिपट कर रोई थी मैं इक शजर से

नवीन सी० चतुर्वेदी की ग़ज़लें

वह तो द्वापर था महोदय आज भी यह सत्य है
गोपियों  को  कोई  भी  उद्धव  पढ़ा सकता नहीं

सत्यम भारती की ग़ज़लें

अक्षर-अक्षर सत्य दिखाई देता है
सुख-दुख सबकुछ आकर ठहरा चेहरे पर
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सपने, ख़ुशबू, बादल, जुगनू
सबका कारोबार तुम्हीं से