Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
महेश यादव ‘मधुर‘ के मुक्तक

अगर कोई समस्या हो तो उसका हल भी मिलता है। 
बिना कोई समस्या के नहीं जीवन ये चलता है। 
हमारे पास है हल भी ज़रा तो सोचकर देखो,
अगर इक बन्द हो जाये तो दूजा द्वार खुलता है।। 

संजय कुमार गिरि के मुक्तक

हुआ जब भारती के लाल का फिर से यहाँ वंदन
महकने है लगी माटी लगा जब भाल पे चंदन