Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
सत्यम भारती की ग़ज़लें

ख़ुशियों का पल उतरा है
बादल-बादल उतरा है

सारे जग का उजियारा
किरणों में ढल उतरा है

वीरेन्द्र खरे 'अकेला' की ग़ज़लें

करें ख़ुद ग़लतियाँ और गालियाँ बंदों को बक जाएँ
भरोसा कुछ नहीं ज़िल्ले-इलाही कब सनक जाएँ

जुटे हैं सारे दरबारी अभी पर्दे सजाने में
यही हैं कोशिशें दरबार के सब पाप ढक जाएँ

किशन तिवारी की ग़ज़लें

माफ़ कर देना हमें इतिहास अपनी भूल पर
इस सदी ने बोई जो बतलाओ नफ़रत ठीक है!

अंजू केशव की ग़ज़लें

हर जख़्म मेरा वक़्त ने भर तो दिया लेकिन
तकलीफ़ जो दिल की है वही कम नहीं होती