Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
मोहित नेगी 'मुंतज़िर' की कविताएँ

युवा रचनाकार मोहित नेगी 'मुंतज़िर' की इन कविताओं में पहाड़ी जीवन और विस्थापन की कसक मन कचोटती है। यह कसक न केवल वहाँ के लोगों की है, बल्कि पहाड़, नदी, गधेरे तथा उन तमाम जगहों की भी है, जो अपने रहवासियों के लिए छटपटाते हैं। मोहित की ये कविताएँ विस्थापन से उपजी पीड़ा का मार्मिक दस्तावेज़ हैं।

लाल्टू की कविताएँ

कवि लाल्टू की कविताएँ अपने समय के संदर्भों तथा सरोकारों पर स्वयं से ही संवाद करती हैं। ऐसा संवाद, जिसमें प्रश्न भी हैं और उत्तर भी। फ़िक्र भी है और उम्मीद भी। ये कविताएँ एक आईने के अक्स की मानिंद हैं, जो हमें अपने दौर के सच से मुख़ातिब करती हैं। डराती हैं। लेकिन सचेत भी करती है।

विजय सिंह नाहटा की कविताएँ

विजय सिंह नाहटा की कविताएँ अपने समय के सन्दर्भों से टकराकर उसी बेचैनी को जीती हैं, जिन्हें उनका समाज जीने को अभिशप्त है। तीखी और मारक कहन के माध्यम से कवि अपनी कविताओं को एक औजार में बदलने को तत्पर दिखता है। एक ऐसा औजार, जो अपने उधड़े हुए दौर की तुरपाई कर सके। इस जद्दोजहद में स्मृति, प्रकृति और कविता उनके 'ठहराव-बिंदु' की तरह खड़े दिखते हैं।

डाॅ० सुरंगमा यादव की कविताएँ

डाॅ० सुरंगमा यादव की प्रस्तुत कविताएँ हमारे समय में चटकते हुए संबंधों की मूक वेदना हैं, अस्तित्व का संघर्ष हैं और आस की बची हुई लौ हैं। इन कविताओं में हमारा वर्तमान और उस वर्तमान की चुनौतियाँ सहजता के साथ उपस्थित दिखती हैं। ये कविताएँ एक अनुभवी के परामर्श की भांति भी सहेजे जाने योग्य हैं।

- के० पी० अनमोल