Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
वीरेन्द्र खरे 'अकेला' की ग़ज़लें

करें ख़ुद ग़लतियाँ और गालियाँ बंदों को बक जाएँ
भरोसा कुछ नहीं ज़िल्ले-इलाही कब सनक जाएँ

जुटे हैं सारे दरबारी अभी पर्दे सजाने में
यही हैं कोशिशें दरबार के सब पाप ढक जाएँ

किशन तिवारी की ग़ज़लें

माफ़ कर देना हमें इतिहास अपनी भूल पर
इस सदी ने बोई जो बतलाओ नफ़रत ठीक है!

अंजू केशव की ग़ज़लें

हर जख़्म मेरा वक़्त ने भर तो दिया लेकिन
तकलीफ़ जो दिल की है वही कम नहीं होती

विनय मिश्र की ग़ज़लें

जीवन परतों दर परतों में सिमट गया
सारा मौसम दो आंँखों में सिमट गया

होने को था मेरा क़द कुछ बड़ा मगर
मैं जीने की तरकीबों में सिमट गया