Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
डॉ० नलिन की ग़ज़लें

एक हैं तन मन जहाँ  
बात क्या शह-मात की 

सत्यशील राम त्रिपाठी की ग़ज़लें

लील  जाती हैं सड़क पगडंडियाँ
काश पगडंडी भी सड़कों पर चढ़े

इक़रा अम्बर की ग़ज़लें

परिंदों ने मुझे अपना लिया है
लिपट कर रोई थी मैं इक शजर से

नवीन सी० चतुर्वेदी की ग़ज़लें

वह तो द्वापर था महोदय आज भी यह सत्य है
गोपियों  को  कोई  भी  उद्धव  पढ़ा सकता नहीं