Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

नवीन सी० चतुर्वेदी की ग़ज़लें

नवीन सी० चतुर्वेदी की ग़ज़लें

जाल में किसी को जब तुम तड़पता देखोगे
और बचा न पाओगे तब हृदय द्रवित होगा


ग़ज़ल- एक 

फैला  दसों दिशाओं में जितना  प्रकाश है
हर मन में जो बसा है उसी का प्रकाश है

भ्रम  दूर कर न पाये वो खद्योत भी  नहीं
आँखों  को खोल दे वो ही सच्चा प्रकाश है

इक रंग तो  बताओ  जो अनुराग  में नहीं
इक  मात्र  ये  ही  रंग-रँगीला  प्रकाश है

असहाय व्यक्ति के लिए तो धूप भी है धुन्ध
जब कष्ट में हो कोई तो करुणा प्रकाश है

जैसे  ही  नैन मूँदे तो  इक जोत-सी जले
जब उसकी बात हो तो अँधेरा प्रकाश है

************


ग़ज़ल- दो 

तज  के  मैली-मैली  कोरी-कोरी  गागर भरती है
चोर  नहीं  है  फिर भी चोरी-चोरी गागर भरती है

ओ  रसिया मोरे मन बसिया तोरा ही तो है सबकुछ
ओ  परमातम  तोरी  आतम  तोरी गागर  भरती है

साँवरिया  तोरी ये गुजरिया तोरी डगरिया जोह रही
तोरे दरसन  कर  के  ही ये निगोरी गागर भरती है

जनम-जनम के प्यासों को इतना तरसाना ठीक नहीं
अब  तो  रस बरसा  दे चाँद, चकोरी गागर भरती है

काम  दिया  तो  करने  भी  दे काहे भरमाता  है तू
मार  न  कंकर  मत कर  जोराजोरी गागर भरती है

************


ग़ज़ल- तीन 

मीत  को  मनाओगे  तब  हॄदय द्रवित होगा
मन से मन मिलाओगे तब हृदय द्रवित होगा

जाल में  किसी  को जब तुम तड़पता देखोगे
और बचा  न पाओगे  तब  हृदय द्रवित होगा

कोई  जब पुकारे  पर  भाग्यवश तभी उससे
दूर  होते  जाओगे  तब  हृदय   द्रवित  होगा

आप अपने जीवन से काम, क्रोध, लिप्सा और
स्वार्थ  को  घटाओगे  तब  हृदय  द्रवित होगा

इन दिनों भले ही यह  सबको चाहिए फिर भी
मन  से  धन  हटाओगे  तब हृदय द्रवित होगा

************


ग़ज़ल- चार 

आप  कहते  हैं  अल्प   है साथी
अब  सदाचार  स्वल्प  है  साथी

भीड़  में  हैं  तो  साथ  चलना है
अन्यथा  क्या  विकल्प  है  साथी

इसका   पर्याय    ढूँढिये ही मत
मित्रता   निर्विकल्प     है  साथी

यह  तुम्हें  स्वर्ण-सा  बना  देगी
वेदना   काय-कल्प   है   साथी

धन को अमरस बता रहे हो तुम
ये  शिकंजी  का  पल्प  है साथी

ये  जो  हिन्दी  ग़ज़ल है  मेरी है
हाँ   ये  मेरा  प्रकल्प  है  साथी

************

0 Total Review

Leave Your Review Here

रचनाकार परिचय

नवीन सी० चतुर्वेदी

ईमेल : navincchaturvedi@gmail.com

निवास : मुंबई (महाराष्ट्र)

जन्मतिथि- 27 अक्तूबर, 1968
जन्मस्थान- मथुरा (उत्तरप्रदेश)
शिक्षा- स्नातक (वाणिज्य)
संप्रति- मुम्बई में Security-Safety-IT Equipments के व्यवसाय में संलग्न
साहित्यिक गतिविधियाँ-
ब्रजभाषा, हिंदी, उर्दू, गुजराती एवं मराठी में ग़ज़ल सृजन
हिन्दुस्तानी साहित्य सेवार्थ 'कविता कोश' एवं 'साहित्यम' सहित अनेक वेब पोर्टल्स के सम्पादकीय-मण्डलों में प्रतिनिधित्व
अंतरजाल के माध्यम से पिंगलीय छन्दों एवं ग़ज़लों से सम्बन्धित अर्जितोपार्जित ज्ञान पर कार्यशालाओं का आयोजन
देशभर में अनेक मंचों से काव्यपाठ
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन एवं अन्तर्जालीय उपस्थितियाँ
ऑडियो/वीडियो एल्बमों के लिए लेखन
विशेष- ब्रजगजल प्रवर्तक
प्रकाशन-
पुखराज हबा में उड़ रए एँ (सर्वप्रथम ब्रजगजल संग्रह, 2015), मोरछल (ब्रजगजल संग्रह, 2020), धानी चुनर (हिंदी गजलों का संग्रह, 2022)
ब्रजगजल संग्रह (ब्रजगजलों का साझा संकलन, 2018),
सम्मान/पुरस्कार-
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा बाबु जगन्नाथ दास रत्नाकर पुरस्कार (ब्रजगजल संग्रह ‘मोरछल’ के लिए)
हिंदी पुस्तकालय समिति डीग (राजस्थान) द्वारा ब्रजभाषा में गजलों के शुभारम्भ के लिए सम्मान
साहित्य सम्मलेन नाथद्वारा द्वारा ब्रजभाषा में नयी विधा ब्रज गजल का शुभारम्भ करने एवं अन्य व्यक्तियों को भी इस प्रकल्प में जोड़ने के लिए सम्मान इंशाद द्वारा विविध भाषाओं में ग़ज़ल सृजन हेतु 'फ़रोग़-ए-इंशाद' सम्मान
निवास- मुंबई (महाराष्ट्र)
मोबाइल- 9967024593