Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
डॉ० शैलेष गुप्त 'वीर' की ग़ज़लें

शैलेष गुप्त 'वीर' हिन्दी की अनेक विधाओं के सिद्धहस्त कवि हैं। कई विधाओं में इन्हें महारत हासिल है। आपकी ग़ज़लें भी अच्छी, स्तरीय ग़ज़लें हैं, जो एक ओर शिल्प तथा भाषा में सधी हुई हैं, वहीं सामयिक कथ्य व सरोकार सम्पन्नता लिए हुए हैं। सीधी-सादी और चुटीली शैली इनकी ग़ज़लों को विशिष्टता प्रदान करती है। ये ग़ज़लें आम-जीवन और आम-आदमी के परिवेश की ग़ज़लें हैं।

फ़ानी जोधपुरी की ग़ज़लें

उर्दू ग़ज़ल की लम्बी और समृद्ध परम्परा का एकदम ताज़ादम चेहरा हैं फ़ानी जोधपुरी। इनकी ग़ज़लें पारंपरिकता का जितना अच्छा निर्वहन करती हैं, उतनी ही ताज़गी के साथ अपनी विधा को सींच रही हैं। इनकी ग़ज़लों में जीवन की जद्दोजहद से उपजा नैराश्य बराबर देखने में मिलता है लेकिन इस नैराश्य के बीच उम्मीद की रौशनी कभी धीमी नहीं पड़ती। यह उम्मीद इनके लेखन की ही नहीं, हमारे वर्तमान और भविष्य की भी घनघोर ज़रूरत है। दुनिया की उपस्थिति तथा उसकी समझ फ़ानी की ग़ज़लों को 'मास्टरपीस' बनाती हैं।

शमीम हयात की ग़ज़लें

शमीम हयात की ग़ज़लें ठण्डी और ताज़ी बयार के झौंके की तरह हैं। ये ग़ज़लें कहन और कथ्य दोनों में नवीनता लिए हुए हैं। इसमें स्व तथा पर दोनों ही अनुभूतियाँ पूरी जीवंतता से उपस्थित हैं। कई जगह सरोकार सम्पन्नता भी प्रभावी है।

- के० पी० अनमोल

गोविन्द गुलशन की बीस ग़ज़लें

बेहद सादा और आसान ज़ुबान में हर आम और ख़ास के मन की बातों को शायरी में ढालते हैं गोविन्द गुलशन साहब। जहाँ इनकी ग़ज़लों के शिल्प और भाषा एकदम पके-पकाये मालूम पड़ते हैं, वहीं इनका कथ्य बिलकुल हमारे जीवन का, हमारे मन का होता है। गुलशन साहब की शायरी में शायरी का परंपरागत स्वरूप अपने आपको संरक्षित पाता है। वहीं दुनिया की समझ और इनका अपना कहन उसे और ख़ास बनाते हैं।

- के० पी० अनमोल