Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
विकास वाहिद की ग़ज़लें

ये  मुश्किलें  भला  क्या  ही  बिगाड़तीं  मेरा
कि मुश्किलों से तो फ़ौलाद हो के निकला मैं

मक़सूद अनवर मक़सूद की ग़ज़लें

ग़म न दो इतना कि मेरी जाँ निकल जाए कहीं 
आँसुओं से जिस्म की मिट्टी न गल  जाए  कहीं

मुकेश आलंम की ग़ज़लें

दुनिया का दिल रखते-रखते सब अरमाँ क़ुर्बान किये
हमने सारी फ़ौज लगा  दी  पत्थर  की  निगरानी  में

ख़ुरशीद खैराड़ी की ग़ज़लें

गले मिलकर बनाते हैं यही मज़बूत इक रस्सी
गर आपस में उलझ जाएँ तो धागे टूट जाते हैं

चमन में बेटियों के वालिदों-सा हाल है इनका
उठाकर तितलियों का बोझ पौधे टूट जाते हैं