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लिम्बू : कला, साहित्य की अंतिम कड़ी- डॉ० शोभा लिम्बू यल्मो

लिम्बू समुदाय के कला, साहित्य, सौंदर्य शास्त्र के विविध पहलुओं के विवेचनाओं के बाद इस निष्कर्ष पर पहुँचते है कि भाषा साहित्य की पहचान और विकास के लिए भाषा को समृद्ध और संरक्षित होना बहुत आवश्यक है तभी हमारी सामाजिक भाषिक पहचान विश्व पटल पर सम्भव हो पाएगी और हम पूर्ण रूप से सक्षम कहलाएँगे।

 

लिम्बू : कला, साहित्य (भाग चार)डॉ० शोभा लिम्बू यल्मो

लिम्बू समुदाय में लोकगीत /लोकनृत्य व्यक्ति विशेष के मन के अंदर छिपे हुए सुख-दुख, हर्षोल्लास, शोक विस्मय आदि अनुभूतियों को अभिव्यक्त करने का एक माध्यम मात्र हैं।

लिम्बू : कला, साहित्य (भाग दो )डॉ० शोभा लिम्बू यल्मो

 
 लिम्बू जनजाति की कलाओं के विषय में बात कही जाय तो इनकी कला बहुत ही सान्दर्भिक और प्रकृति से जुड़ी हुई है। 

लिम्बू : कला, साहित्य (भाग तीन)डॉ० शोभा लिम्बू यल्मो

लिम्बू  चित्रकारिता में  उनके सभ्यता और संस्कृति की छाप स्पष्ट रुप से परिलक्षित होती है। वे अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं के कितने धनी है।