Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
स्वाधीनता संग्राम और 'चाँद' का ऐतिहासिक 'फाँसी अंक'- डॉ० मुकेश कुमार

शायद सुनने में आपको थोड़ा आश्चर्यजनक लगेगा पर 'चाँद' पत्रिका के 'फाँसी' अंक के संपादक आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने यह बात लिखी है। अगर यह सच है तो 'चाँद' हिंदी की अब तक सबसे अधिक बिकने वाली साहित्यिक पत्रिका थी, क्योंकि उस ज़माने मे चाहे 'सरस्वती' हो, 'प्रताप' हो या 'हंस', 'माधुरी' या 'मतवाला' कोई पत्रिका दस-बीस हज़ार से अधिक नहीं बिकती थी।

रेत समाधि और गीतांजलि श्री- डॉ० शुभा श्रीवास्तव

'रेत समाधि' अपने कथ्य और शिल्प में नवीन उपन्यास है। रेत समाधि में ऐसी स्त्री है, जो हर स्त्री के अंदर छिपी हुई है। वह अपने आपमें साधारण है, परंतु अपनी प्रस्तुति में असाधारण है। उपन्यास में ऐसा संसार है, जो परिचित है और अपने जादुई अंदाज में हमारे सामने आता है। रेत समाधि मौत के दरवाज़े पर जिजीविषा की कथा को कहता है। रेत समाधि अपनी औपन्यासिक शैली के लिए विशेष प्रसिद्ध रहा है।

बशीर बद्र : जीवन और संवेदना का सहज सृजन संसार- शैलेन्द्र चौहान

बशीर बद्र केवल प्रेम और उदासी के शायर नहीं हैं; वे मानवीय संबंधों के शायर हैं। उनकी कविता हमें याद दिलाती है कि आधुनिक सभ्यता की आपाधापी में भी मनुष्य को प्रेम, आत्मीयता और स्मृति की आवश्यकता बनी रहती है। वे हमें यह भी बताते हैं कि जीवन की सबसे बड़ी पूँजी संवेदनशीलता है।

बाल साहित्य में पर्यटन- कृष्ण बिहारी पाठक

पर्यटन के अनुभव बालक के निजी अनुभव बनते हैं इसलिए विभिन्न संदर्भ में प्रचलित राय, दृष्टिकोण आदि को तथ्यात्मकता की कसौटी पर परखने लगता है। पर्यटन से उसका समालोचनात्मक चिंतन और कौशल निखरता है। इसी तरह रचनात्मकता भी पर्यटन के स्पर्श से निखरने लगती है।