Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
बबीता कुमावत के नारी विषयक हाइकु

पढ़ी-लिखी नारी ने दुनिया को तो बदला ही है, अपनी दुनिया को भी बहुत बेहतर किया है। ज्ञान नारी के लिए बहुत आवश्यक है और ज्ञानी नारी संसार के लिए। पढ़-लिखकर नारी ने किस तरह अपना जीवन सँवारा है और किस तरह बदलाव की सकारात्मक स्थितियाँ पैदा की हैं, बबीता कुमावत जी ने उन्हें अपनी हाइकु रचनाओं के माध्यम बहुत अच्छी तरह अभिव्यक्त किया है। इन रचनाओं में महिला सशक्तीकरण की झलक भी है तथा महिलाओं के संघर्ष और उस संघर्ष की जीत की आभा भी।

- के० पी० अनमोल

चक्रधर शुक्ल के हाइकु

हिन्दी काव्य के समकालीन परिदृश्य में चक्रधर शुक्ल का नाम महत्त्वपूर्ण है। बाल कविता, क्षणिका काव्य और व्यंग्य उनके लेखन के प्रमुख आयाम हैं। यद्यपि उन्होंने हाइकु विधा में भी पर्याप्त लेखन कार्य किया है। उनके हाइकु उनकी रचनाधर्मिता के विशिष्ट उदाहरण हैं। इन हाइकुओं में उन्होंने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों और भावनाओं को प्रस्तुत किया है। शुक्ल जी के हाइकु संक्षिप्त और प्रभावशाली हैं। उन्होंने अपने विचारों को प्रभावी अभिव्यक्ति प्रदान की है। उनके हाइकुओं में प्रकृति का सुन्दर वर्णन है, जैसे कि नदी का पानी, तितलियों का फूलों को परखना और मौसम की क्रूरता आदि। शुक्ल जी के हाइकुओं में मानव जीवन की विसंगतियों का अंकन है। साथ ही उनके हाइकुओं में भावनात्मक अभिव्यक्ति है, जैसे कि आँखों में पीर, मन अधीर, और तितली का डरना आदि। वे हाइकु को अधिक प्रभावी बनाने के लिए संकेतात्मक भाषा का उपयोग प्रभावी विधि से करते हैं। जैसे कि 'नदी का पानी/ गाँव में चढ़ आया/ सन्नाटा छाया' में नदी का पानी सामाजिक समस्याओं का प्रतीक है। वरिष्ठ रचनाधर्मी श्री चक्रधर शुक्ल के हाइकु शिल्प के साथ न्याय करते हैं और सौंदर्यबोध की आभा से युक्त हैं।

- डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर

पवन कुमार जैन के हाइकु

नभ में शोर
चल रहा हो जैसे
संसद सत्र।

गंगा पांडेय 'भावुक' के हाइकु

लँगड़ी आँधी 
छत टीन ले उडी 
जैसे पतंग।