Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
योगराज प्रभाकर की लघुकथा 'अदृश्य आघात' पर सीमा सिंह की मीमांसा

असली आघात वह है जो घर के भीतर, आत्मीयता के सबसे सुरक्षित समझे जाने वाले घेरे में घटित होता है। थकी-हारी पत्नी का दफ्तर से लौटना और अपने जीवनसाथी से सहानुभूति की अपेक्षा करना एक स्वाभाविक मानवीय प्रक्रिया है।

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ की लघुकथा 'नवजन्मा' पर सीमा सिंह की मीमांसा

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ जी द्वारा रचित लघुकथा ‘नवजन्मा’ हिंदी लघुकथा साहित्य की एक उत्कृष्ट बानगी है। यह रचना न केवल सामाजिक रूढ़ियों पर प्रहार करती है, बल्कि अपनी विशिष्ट शिल्पगत बारीकियों के माध्यम से पाठक की संवेदनाओं को भी झकझोरती है। इस कथा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह लघुकथा के मानकों का बड़ी शालीनता से पालन करती चली है बिना किसी आडंबर और शोर के।

सुकेश साहनी की लघुकथा 'उतार' की मीमांसा- सीमा सिंह

लघुकथाएं आकार में लघु होती हैं, वे अपने भीतर गहरे अर्थ संजोए रहती हैं। कई बार आम पाठक के तौर पर हम कथा के उस निहितार्थ तक नहीं पहुँच पाते हैं। लेखक के अभिप्राय तक पहुँचने में कथा की यह मीमांसा पाठकों को सहज सहयोग प्रदान करेगी। इस कार्य का शुभारंभ करने के लिए सुकेश साहनी जी से बढ़कर किसका नाम हो सकता था भला! लघुकथा मीमांसा की श्रृंखला में पहली कथा है- सुकेश साहनी जी की लघुकथा 'उतार'।