Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
ग़ज़लगोई को समझने के लिए भी पढ़ा जाना चाहिए : आसमां तू ही बता- के० पी० अनमोल

संग्रह की ग़ज़लों के विषय विविधता भरे हैं। लहजे को परंपरागत ही रखते हुए मक़सूद साहब परंपरागत घेरे के बाहर से भी अपने कथ्य चुनते हैं, साथ ही अपनी कहन को विशेष रखने का प्रयास करते हैं और यहाँ वे गज़लगोई में सफल हो उठते हैं।

नए प्रयोग और सशक्त कहन का नायाब नमूना : मकड़जाल- रामकुमार भाम्भू

संग्रह में सात लम्बी कहानियाँ हैं, जिनमें से अधिकतर किसी न किसी पत्रिका में छपी है और शेष छपने के लिए स्वीकृत हैं। नई विषय-वस्तु और कहन का अंदाज़ लम्बी कहानियों को पठनीय बना देता है।

जीवन की हकीकत की शायरी: पागल-पागल कहते लोग- के० पी० अनमोल

पागल-पागल कहते लोग आसान भाषा और सरल कहन की अच्छी शायरी का पठनीय संग्रह है। आधारशिला प्रकाशन की अनुभवी टीम ने इसे साफ़-सुथरे और सुंदर ढंग से प्रकाशित किया है।

बार-बार उग ही आएँगे : ज़िन्दगी के नए नज़रिये का गीत-  डॉ० ज़ियाउर रहमान जाफ़री

हिंदी नवगीत में जो चंद नाम सबसे ज़्यादा लोगों का ध्यान खींच रहे हैं, उनमें एक नाम गरिमा सक्सेना का भी है। बार-बार उग ही आएँगे उनका सद्य प्रकाशित पचास गीतों का संग्रह है। किताब के नाम से ही ज़ाहिर है गरिमा तमाम अवरोधों के बावजूद भी उग आने का साहस रखती हैं। उनकी भाषा गीत के अनुकूल नर्म, सरस, मुलायम और कोमल है।