Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
गोविंद गुलशन साहब पुराने को सहेजते हुए नया रचते हैं- के० पी० अनमोल

सादा जुबान में बिना किसी चमत्कारपूर्ण शब्दावली के, बिना उक्तिवैचित्र्य के, बिना किसी शोर-शराबे के बहुत सलीक़े के साथ हमें यहाँ गहरी व्यंजनात्मकता के साथ शायरी मिलती है। पुस्तक की कथा-वस्तु का दायरा भी बहुत व्यापक है, जहाँ उर्दू शायरी के परंपरागत बिम्ब, प्रतीक और विषय भी हैं तो नए ज़माने का बदलाव और नए समय की सच्चाई भी।

पैमाने नये आये : अवाम की आवाज़ से निकली हुई ग़ज़ल- डॉ० ज़ियाउर रहमान जाफ़री

अशोक कुमार नीरद की ग़ज़लें ज़मीन से जुड़ी हुई हैं। यही कारण है कि हिंदी ग़ज़ल के बेशतर आलोचकों के भी वह प्रिय शायर हैं। कमलेश भट्ट 'कमल' को जहाँ उनकी ग़ज़लों का तेवर पसंद आता है, वहीं हरेराम समीप और अनिल गौड़ को उनके द्वारा ग़ज़ल में किए गये प्रयोग अच्छे लगते हैं।

क्षणिका विधा पर गंभीर वैचारिक दृष्टि का परिणाम है 'समकालीन क्षणिकाकार'- हरकीरत हीर

अनुक्रमणिका से ज्ञात होता है कि इस संग्रह में वरिष्ठ, समकालीन और युवा- तीनों पीढ़ियों के क्षणिकाकारों को समान सम्मान के साथ स्थान दिया गया है। यह चयन-दृष्टि संग्रह को व्यापक और प्रतिनिधिक बनाती है।

नींद हुआ मैं तुमसे गुस्सा : नवीन भाव-बोध की सरस कविताएँ- सुरेश चन्द्र 'सर्वहारा'

समीक्ष्य पुस्तक- नींद हुआ मैं तुमसे गुस्सा
विधा- बाल कविता
रचनाकार- योगेन्द्र प्रताप मौर्य
प्रकाशक- फ्लाइड्रीम्स पब्लिकेशन्स, नई दिल्ली
संस्करण- प्रथम, 2025
मूल्य- ₹160/-
पृष्ठ संख्या- 47