Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
ग़ज़लों का एक सरस और पठनीय संग्रह : मुन्तज़िर हूँ मैं- के० पी० अनमोल

ग़ज़ल कहते समय वे (मंजुल निगम) रवायत का पूरा ध्यान रखती हुई हमारे दौर पर भी बराबर नज़र बनाए रखती हैं। उनकी ग़ज़लों में पारंपरिकता पूरी तरह मौजूद होने के साथ सम-सामयिकता भी देखने को मिलती है। दुनिया को देखने-समझने का अपना एक नज़रिया है इनके पास और उसी के दम पर वे अपने शेरों को बुनती हैं। जीवन-दर्शन के अलावा सरोकार तथा प्रेम इनकी ग़ज़लों का मुख्य कथ्य बनते हैं।

कुसुमलता सिंह की बाल-कहानियों का संग्रह : हवा की घंटी- सुरेन्द्र विक्रम

हवा की घंटी कुसुमलता सिंह की 10 बालकहानियों का संग्रह है, जिनमें एक ओर साहस तथा रोमांच है तो दूसरी ओर कुछ अच्छा करने का संकल्प और कठिन परिश्रम को ही सफलता का विकल्प मानने का फार्मूला बताया गया है। जीवन में सफलता के शिखर पर चढ़ने की कामना तो सब करते हैं लेकिन उसके लिए कठोर परिश्रम को अपनाने के लिए तैयार कम ही लोग होते हैं। जो कठिन परिश्रम करते हैं, सफलता आगे बढ़कर उनके चरण चूम लेती है।

जटिल मनःस्थितियों की उलझी हुई कविताएँ- रामकिशोर मेहता

यह कविता संग्रह भारत सहित पूरे विश्व को अपने विषय के रूप में समेटे है। ये इस काल के मानव संघर्ष की कविताएँ हैं। ये कविताएँ आम आदमी की पक्षधर हैं। कवि के शब्दों में- इनमें आत्मा की बेचैनियाँ हैं, प्रेम की उधेड़बुन हैं, फ़जीहतें हैं, दुरूहताएँ हैं और उनमें अपना रास्ता खोजने की कोशिशें हैं।

वासना से विवेक तक : सुनयना- डॉ० अरुण कुमार निषाद

‘यादृश: कविस्तादृशी काव्यवन्धच्छाया’ विद्वत्सालभञ्जिका ग्रन्थ की यह सूक्ति डॉ० महेशचन्द्र शर्मा गौतम पर एकदम सभाष्य (सटीक) बैठती है। डॉ० महेशचन्द्र  शर्मा गौतम एक ऐसे उपन्यासकार हैं जो अपनी रचना का वर्ण्य विषय अपने आधुनिक समाज से लेते हैं।