Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
मनभावन बाल कहानियाँ- कौशल पाण्डेय

डॉ० जयप्रकाश प्रजापति 'अंकुश कानपुरी' की ग्यारह बाल कहानियों के इस पांचवें संग्रह 'अंकुश कानपुरी की बाल कहानियाँ' में दो तरह की बाल कहानियाँ हैं।

अंधकार के विरुद्ध गीतात्मक प्रतिरोध : जहाँ नहीं उजियार का सामाजिक यथार्थ- अवनीश त्रिपाठी

'जहाँ नहीं उजियार' केवल एक नवगीत-संग्रह नहीं, बल्कि हमारे समय के सामाजिक अंतर्विरोधों का गीतात्मक दस्तावेज है। योगेन्द्र मौर्य के नवगीत दलित चेतना को केंद्र में रखते हुए उस व्यापक मानवीय संघर्ष को स्वर देते हैं, जो समानता, गरिमा और न्याय की खोज से जुड़ा है। इन गीतों में पीड़ा का स्वर है, पर उससे अधिक परिवर्तन की आकांक्षा है; अंधकार का चित्रण है, पर उससे भी अधिक उजियार की संभावना पर विश्वास है।

फ़िक्र की गहराई, जज़्बात की मुख़्तलिफ़ पहलुओं से तरजुमानी और बयान की लज़्ज़त- मो० इशरत सग़ीर

गोविंद गुलशन जी का तअल्लुक़ उस्ताद शाइर कृष्ण बिहारी 'नूर' के शे'री घराने से बराहे-रास्त था। ऐसे में उनके यहाँ ग़ज़ल का हुस्न रवायत के तमाम तक़ाज़ों पर पूरा उतरता है। गोविंद गुलशन जी ख़ुद उस्तादी के ओहदे पर फाइज़ हो चुके थे। यही सबब है कि उनके शागिर्दो ने उनकी ग़ज़लों को यकजा कर 'कल न कल तो तेरे' उन्वान के तहत इरा पब्लिकेशन, कानपुर से शाया किया है।

गोविंद गुलशन साहब पुराने को सहेजते हुए नया रचते हैं- के० पी० अनमोल

सादा जुबान में बिना किसी चमत्कारपूर्ण शब्दावली के, बिना उक्तिवैचित्र्य के, बिना किसी शोर-शराबे के बहुत सलीक़े के साथ हमें यहाँ गहरी व्यंजनात्मकता के साथ शायरी मिलती है। पुस्तक की कथा-वस्तु का दायरा भी बहुत व्यापक है, जहाँ उर्दू शायरी के परंपरागत बिम्ब, प्रतीक और विषय भी हैं तो नए ज़माने का बदलाव और नए समय की सच्चाई भी।