Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
पैमाने नये आये : अवाम की आवाज़ से निकली हुई ग़ज़ल- डॉ० ज़ियाउर रहमान जाफ़री

अशोक कुमार नीरद की ग़ज़लें ज़मीन से जुड़ी हुई हैं। यही कारण है कि हिंदी ग़ज़ल के बेशतर आलोचकों के भी वह प्रिय शायर हैं। कमलेश भट्ट 'कमल' को जहाँ उनकी ग़ज़लों का तेवर पसंद आता है, वहीं हरेराम समीप और अनिल गौड़ को उनके द्वारा ग़ज़ल में किए गये प्रयोग अच्छे लगते हैं।

क्षणिका विधा पर गंभीर वैचारिक दृष्टि का परिणाम है 'समकालीन क्षणिकाकार'- हरकीरत हीर

अनुक्रमणिका से ज्ञात होता है कि इस संग्रह में वरिष्ठ, समकालीन और युवा- तीनों पीढ़ियों के क्षणिकाकारों को समान सम्मान के साथ स्थान दिया गया है। यह चयन-दृष्टि संग्रह को व्यापक और प्रतिनिधिक बनाती है।

नींद हुआ मैं तुमसे गुस्सा : नवीन भाव-बोध की सरस कविताएँ- सुरेश चन्द्र 'सर्वहारा'

समीक्ष्य पुस्तक- नींद हुआ मैं तुमसे गुस्सा
विधा- बाल कविता
रचनाकार- योगेन्द्र प्रताप मौर्य
प्रकाशक- फ्लाइड्रीम्स पब्लिकेशन्स, नई दिल्ली
संस्करण- प्रथम, 2025
मूल्य- ₹160/-
पृष्ठ संख्या- 47

ग़ज़लों का एक सरस और पठनीय संग्रह : मुन्तज़िर हूँ मैं- के० पी० अनमोल

ग़ज़ल कहते समय वे (मंजुल निगम) रवायत का पूरा ध्यान रखती हुई हमारे दौर पर भी बराबर नज़र बनाए रखती हैं। उनकी ग़ज़लों में पारंपरिकता पूरी तरह मौजूद होने के साथ सम-सामयिकता भी देखने को मिलती है। दुनिया को देखने-समझने का अपना एक नज़रिया है इनके पास और उसी के दम पर वे अपने शेरों को बुनती हैं। जीवन-दर्शन के अलावा सरोकार तथा प्रेम इनकी ग़ज़लों का मुख्य कथ्य बनते हैं।