Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
डॉ० स्वदेश भटनागर की कविताएँ

देह के भूगोल की कार्यप्रणाली का यह सच
मुझे ब्रह्मांड की किताब का
सबसे सुंदर चित्र बना देता है

डॉ० नवीन दवे मनावत की कविताएँ

क्यों छीनकर हम मजबूरन
प्रेम को आमंत्रित करते हैं?
यह आलिंगन, चुंबन, रति
नहीं है देह की चाह
केवल और केवल है
प्रेम का निर्जीव निर्माण
जो प्रेम का प्राण नहीं, प्रयाण है
जिस पर हँसती हर युग की एक निश्छल पीड़ा। 

ललन चतुर्वेदी की कविताएँ

दुःख कुआँ है
माँ कहती थी बड़ी विलक्षण बात-
एक कुएँ से भर जाते हैं सात कुएँ
सात कुएँ भर नहीं सकते एक कुआँ

जयप्रकाश मानस की कविताएँ

सीपी, शंख, घोंघे, मोती-
तट पर बिखरे, जैसे कोई
पुरानी डाक का बस्ता खुल गया।