Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
शैलेन्द्र चौहान की कविताएँ

असल में मैं कहीं नहीं हूँ
मेरे पास पैसे नहीं हैं
मै ग्रेजुएट हूँ घर पर बैठा हूँ
सपने हैं और सपने भी वैसे ही
जैसे टीवी सीरियल, सोशल मीडिया से

केशव शरण की कविताएँ

प्यार महान है
यह सबमें एक समान है
पीर महान है
यह सबकी एक समान है

अन्यथा कहाँ
मैं और तू
और कहाँ वे!
देवी व देव!!

सपना चन्द्रा की कविताएँ

कभी-कभार यादें आकर
खटखटाती हैं द्वार मन के
टोहती हैं पेशानी पर एकाध बूँद
बेचैनी भरे लम्हों की

डॉ० प्रभा दीक्षित की कविताएँ

तुम्हारी सभ्यता का चरम ऐश्वर्य
समाहित है भाषा में
तुम्हारी संस्कृति के
स्याह हिंसक पशु भी
विचरते हैं भाषा के जंगल में
इसी से तुम्हारी सभ्यता की
सबसे निचली सीढ़ी पर बैठी है औरतें
गालियों की पोशाक पहने
एक विद्रूप मुस्कान सजाए