Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
प्रतीक झा 'ओप्पी' की कविताएँ

ओपेनहाइमर की नीली आँखों ने
सबकुछ भस्म कर दिया
अब खबर है-
भौतिकी ने प्रतिशोध की ठान ली है

योगेश कुमार ध्यानी की कविताएँ

घूमा यह संसारा ख़ूब
इतना दरिया, इतना दरिया
आँखें जातीं ऊब

दयाराम वर्मा की कविताएँ

देशप्रेम से ओतप्रोत
दुश्मन को ललकारते
ओजस्वी शब्द
स्वर लहरियों पर हुलसित
राग-रागिनी हैं शब्द
सप्त स्वरों का गुंजन भी
मधुर मिलन लय-स्वर शब्द

शैलेन्द्र चौहान की कविताएँ

असल में मैं कहीं नहीं हूँ
मेरे पास पैसे नहीं हैं
मै ग्रेजुएट हूँ घर पर बैठा हूँ
सपने हैं और सपने भी वैसे ही
जैसे टीवी सीरियल, सोशल मीडिया से