Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
शिक्षा बनाम परीक्षा- संदीप तोमर

अभी हाल ही में एक अंग्रेजी के प्रोफ़ेसर ने “दि हिन्दू” अखबार में एक लेख लिखा जिसे मेरे सहित जितने भी शिक्षाविदों, चिंतकों ने पढ़ा होगा उनकी नींद उड़ गयी होगी, ऐसा नहीं है कि इस तरह की घटनाएँ पहले आँखों के सामने से नहीं गुज़रीं लेकिन चूँकि उक्त घटना एक प्रोफेसर के साथ घटी, चुनांचे ध्यान जाना ज़्यादा अहम् है।

रिश्ते काग़ज़ के- डॉ० रजनीकांत

आज रिश्ते स्वार्थों पर आधारित होने लगे हैं। कुछ देकर वापसी चाहते हैं। सब लाभ-हानि देखते हैं। किसी के पास मिलने के लिए समय नहीं है। जब पूछा जाता है तो समय अभाव का रोना रोया जाता है। सभी आजकल व्यस्त हैं। व्यस्तता का ढोंग किया जाता है। दिलों की दूरियाँ लगातार बढ़ती जा रही हैं। रिश्ते दोस्ती और संपर्क दूरियों ने खा लिए हैं।

दिनकर की बाल कविताओं का माधुर्य- डॉ० ज़ियाउर रहमान जाफरी

बाल काव्य विषयक दिनकर की दो पुस्तकें हैं- एक 'मिर्च का मज़ा' और दूसरी 'सूरज का ब्याह'। कहना न होगा कि अन्य साहित्य की तरह दिनकर बाल साहित्य भी प्रभावी ढंग से लिखते हैं।

हिंदी की महिला ग़ज़लकारों के महिला दृष्टिकोण के शेर- के० पी० अनमोल

जीवन के ये तमाम तरह के अनुभव अब जब ग़ज़लों के माध्यम से शेरों में ढलकर आते हैं, तो दुनिया को समझने की एक अलग ही खिड़की खोलते हैं। इस प्रकार की अभिव्यक्ति न केवल महिला पाठकों के लिए मार्गदर्शक हो सकती है बल्कि पुरुष पाठक भी इन शेरों की गहराई तक पहुँचकर एक अलग तरह का अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। साहित्य जीवन का ही प्रतिबिंब माना जाता रहा है फिर जीवन के किसी विशेष पहलु को अभिव्यक्त होने में कैसी झिझक!