Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
भारत और आयरलैंड में हिंदी भाषा के समक्ष चुनौतियाँ और अवसर- प्रशांत शुक्ल

प्रशांत शुक्ल बाईस वर्षों से आयरलैंड में रहते हुए भारतीय भाषा एव संस्कृति के संवर्धन में योगदान कर रहे हैं। हिंदी दिवस पर हिंदी के प्रचार एवं प्रसार पर आपका अत्यंत महत्वपूर्ण आलेख पढ़िए। 

इक्कीसवीं सदी की ग़ज़लें और भारतीय आदर्श- डॉ० सीमा विजयवर्गीय

वेदों से लेकर आज तक की परंपरा बहुत समृद्धशाली है, आदर्शमयी है, अनुकरणीय है, वसुधैव कुटुम्बकम का पाठ पढ़ाने वाली है, ख़ुद जीओ-जीने दो के आदर्श पर चलने वाली है, जो आज भी पूर्णतः सामयिक है। इतनी उदारमयी संस्कृति के पुरोधाओं को शत-शत नमन करते हैं। चूँकि साहित्य समाज का दर्पण है इसलिए शायरी में भी भारतीय संस्कृति, भारतीय आदर्शों का बहुत ख़ूबसूरती के साथ प्रयोग हुआ है।

व्यंग्य क्षणिकाओं के मास्टर-ब्लास्टर : डॉ. परमेश्वर गोयल उर्फ़ काका बिहारी

बहुमुखी प्रतिमा के धनी डॉ० परमेश्वर गोपल उर्फ़ काका बिहारी मूलतः हास्य-व्यंग्य के कवि हैं। व्यंग्य-क्षणिकाओं के माध्यम से साहित्य जगत में आपने अपनी विशिष्ट पहचान बनायी है। आपके द्वारा क्षणिकाओं पर चक्रधर शुक्ल द्वारा विस्तार से की गई चर्चा पढ़िए।  

कभी अपने भी दाँत गिनकर देखे इंसान- राकेश अचल

मैं जिन दाँतों की बात कर रहा हूँ वे बहुउदेशीय होते है। दुनिया बनाने वाले ने दाँत बनाते समय ही उनका काम भी तय कर दिया था शायद इसीलिए आप ये जानकर हैरान होंगे कि दाँत का काम सिर्फ किसी चीज को पकड़ना, काटना, फाड़ना और चबाना ही नहीं है। जानवर इन दाँतों से कुतरने खोदने, सँवारने और लड़ने का काम लेते हैं। दाँत, आहार को काट-पीसकर गले से उतरने योग्य बनाते हैं। खुद ईश्वर ने एक अवतार में अपने दाँतों से सकल ब्रम्हांड को ऊपर उठा लिया था।