Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
आत्मीयता के समंदर गोविंद गुलशन जी- कृष्ण कुमार नाज़

धुएँ  में  हैं  उजाले  की   लकीरें
दिया शायद अचानक बुझ गया है
मगर उसकी रोशनी अब भी हमारी यादों में जल रही है।

गोविन्द गुलशन : जिनकी ज़िन्दगी ग़ज़ल थी- असलम राशिद

गुलशन सर बताते थे कि आपने अपनी पहली मुकम्मल ग़ज़ल शादी के तक़रीबन एक साल बाद 1987 में लखनऊ के सफ़र के दौरान कही थी, और फिर वहाँ से जो सिलसिला शुरू हुआ, वो अपने उरूज पर पहुँचकर भी नहीं रुका।

रेत समाधि और गीतांजलि श्री- डॉ० शुभा श्रीवास्तव

"रेत समाधि अपने कथ्य और शिल्प में नवीन उपन्यास है| रेत समाधि में ऐसी स्त्री है जो हर स्त्री के अंदर छिपी हुई है| वह अपने आप में साधारण है परंतु अपनी प्रस्तुति में असाधारण है| उपन्यास में ऐसा संसार है जो परिचित है और अपने जादुई अंदाज में हमारे सामने आता है| रेत समाधि मौत के दरवाजे पर जिजीविषा की कथा को कहता है| रेत समाधि अपने औपन्यासिक शैली के लिए विशेष प्रसिद्ध रहा है|"

भारतीय वैचारिकी और चिन्तन- श्रीहरि वाणी

भारत में आजकल सनातन शब्द पर बहुत सारी चर्चाएं चल रही हैं, हमारे यहाँ के लिए यह कोई नया शब्द या विचार नहीँ, वैसे भी देखें तो यह शा श्वत प्रकृति का विचार है।