Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
भारतीय वैचारिकी और चिन्तन- श्रीहरि वाणी

भारत में आजकल सनातन शब्द पर बहुत सारी चर्चाएं चल रही हैं, हमारे यहाँ के लिए यह कोई नया शब्द या विचार नहीँ, वैसे भी देखें तो यह शा श्वत प्रकृति का विचार है।

आशा भरी दृष्टि का दिग्दर्शन : बन्द गली से आगे- डॉ० नितिन सेठी

बन्द गली से आगे पुस्तक नयी संभावनाओं के द्वार खोलती है, वैचारिकता के नये मार्गों की ओर ले जाती है और थर्डजेंडर की जीवनरेखा को सहजक्रम भी प्रदान करती है। ‘बन्द गली से आगे’ सोच के खुले मैदानों की ओर आशा भरी दृष्टि से देखने का दिग्दर्शन करवाती है।

हिन्दी ग़ज़ल के क्षितिज पर चमकता सितारा : के० पी० अनमोल- डॉ० भावना

के० पी० अनमोल की ग़ज़लें रवायती शायरी से अलग बड़ी शिद्दत से अपनी ज़मीन तलाशती नज़र आती हैं। शेरों के कहने का अंदाज़, बिम्बों का अलहदा प्रयोग और समसामयिक घटनाओं पर पैनी नज़र इन्हें इनके ही अन्य समकालीन शायरों से अलग करती है।

भारतीय वैचारिकी और चिन्तन- श्रीहरी वाणी

बलात किसी पर अपनी बात थोपने या सहमति हेतु बाध्य करना हमारी सनातन परम्परा में स्वीकार्य नहीं रहा। यहाँ आचार्य शंकर पूरे देश में विद्वानों को अपनी तार्किकता से अपना अनुयायी बनाने के साथ अन्य को निष्प्रयोज्य कह सकते थे लेकिन आज तक चार्वाक दर्शन की पुस्तकें भी हमारे यहाँ पठन-पाठन, विचार हेतु सुरक्षित हैं, विपरीत भाषा-बोली और स्पष्ट कथन के कारण चर्चित कबीर भी विद्वानों से परिपूर्ण काशी नगरी में सम्मानपूर्वक सुरक्षित रहे। वर्तमान काल में भी देखें तो पूरे संसार में विवादित होकर भी ओशो रजनीश और उनके विचार इस देश में दबाए-कुचले नहीं गये। इतना सब होने के बाद भी क्यों ऐसी परिस्थितियाँ बार-बार निर्मित होते रहती हैं कि हमें हमेशा ही पुनर्विचार की ज़रूरत पड़ती रहती है?