Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
रहीम का नीतिकाव्य- कृष्ण बिहारी पाठक

हिंदी साहित्य के नीति काव्यकारों में अब्दुर्रहीम खानखाना एक महत्वपूर्ण नाम है। रहीम ने अपने जीवन में बचपन से ही राजसी वैभव, राजनीतिक षड़यंत्र, युद्ध की त्रासदी, अमीरी-ग़रीबी आदि के अनुभवों को आत्मसात किया था। रहीम ने सच्चे अर्थों में दुनिया और दुनियादारी देखी थी। जगत व्यवहार का ख़ासा अनुभव उनके पास था।

दिवाकर पाण्डेय 'चित्रगुप्त' का लेख 'जबरा पहाड़िया'

बड़ा-सा तिलक लगाने के कारण लोग इसे तिलका के नाम से जानने लगे, जिसका दूसरा मतलब गुस्सैल या लाल आँखों वाला भी होता है। धीरे-धीरे पूरा संथाल इसे अपना सरदार भी मानने लगा, जिस कारण इनके नाम के साथ माझी भी जुड़ गया। इस प्रकार से इतिहास में एक नए किरदार का जन्म हुआ तिलका माझी।

होली- डॉ० ज्योत्सना मिश्रा

फिर से एक बार फागुन लौटा है, पलाश की मद्धम आँच में सुलगता ,आम्र मंजरियों की गंध से महकता वसंत अपने चरम पर पहुँचने को है। महाकवि कालिदास ने ऋतुसंहार में वसंत का वर्णन करते समय लिखा वृक्ष फूलों से लद गये हैं, जल में कमल खिल गये हैं, स्त्रियों के मन में काम जाग उठा है, पवन सुगंध से भर गया है।

समकालीन हिन्दी ग़ज़ल : स्त्री विमर्श- अनामिका सिंह

स्त्री केंद्रित ग़ज़ल को जन केंद्रित ग़ज़ल के साथ एकाकार कर देने से एक सार्थक उपसंहार का सृजन होगा और ग़ज़ल की कालजयी भूमिका तय होगी। जड़मूल्यों से विद्रोह की ग़ज़ल समय की बड़ी माँग है और स्त्री प्रसंग में तो यह सबसे बड़ी माँग है।