Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
चक्कर लगा रही हैं हवाएँ उसी के पास- संतोष सिंह

रोज़मर्रा की ज़िंदगी की उधेड़-बुन, आशा-निराशा, हार-जीत तथा धूप-छाँव को अपने में समेटती गोविन्द गुलशन जी की ग़ज़लें विविधता से भरी हुई हैं।

गोविंद गुलशन : एक बरस की शनासाई, सदियों का रिश्ता- अज़ीज़ नबील

गोविन्द गुलशन साहब से तअल्लुक़ का वक़्त भले ही मुख़्तसर रहा, मगर उनकी मुहब्बत और ख़ुलूस ने उसे सदियों की शनासाई बना दिया। वो सिर्फ़ शायर नहीं, उर्दू तहज़ीब की एक ज़िंदा मिसाल थे। उनकी आवाज़, उनका लहजा और उनका कलाम आज भी दिलों में गूँजता है। कुछ लोग रुख़्सत होकर भी जाते नहीं, गुलशन साहब अब भी हमारे एहसासों में एक ख़ूबसूरत बाज़गश्त की तरह मौजूद हैं।

यादों में रोशन चराग़- रेहान सिद्दीकी

गोविंद गुलशन सिर्फ़ एक शायर नहीं थे, वो मुहब्बत का चलता-फिरता पैग़ाम थे। ऐसी रोशनी, जो नफ़रत के अँधेरों में भी इंसानियत जगाती रही और जो अपनी शायरी के ज़रिए हमेशा ज़िंदा रहेगी।

एक संवेदनशील मार्गदर्शक और एक समर्पित साधक को खो दिया है- डॉ० माला कपूर 'गौहर'

गोविन्द ‘गुलशन’ जी का जाना केवल एक शायर का बिछड़ना नहीं, बल्कि साहित्य का एक सशक्त स्वर, एक संवेदनशील मार्गदर्शक और मेरे जीवन का उस्ताद खो देना है। उनकी रोशनी, उनके शब्द और उनका आशीर्वाद सदा मेरा पथ आलोकित करते रहेंगे।