Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
सोनिया वर्मा के दोहे

सोनिया वर्मा के दोहे जीवन के विभिन्न पहलुओं और उनकी असलियत को समझने के क्रम में मार्गदर्शक का काम करते हैं। नीति तथा दर्शन इनकी रचनाओं के केंद्र-बिंदु हैं, जो यह सिखाने का प्रयास करते हैं कि जीवन को किस प्रकार समझना और कैसे जीना है। ये समकालीन दोहे ख़ुद के आँकलन तथा समाज पर मंथन करने की प्रेरणा देते हैं।

निज़ाम फतेहपुरी के दोहे

निज़ाम फतेहपुरी के प्रस्तुत दोहे उर्दू स्वभाव की कविताई का आस्वाद हिन्दी छन्द में करवाते हैं। इन दोहों में जीवन-दर्शन, सूफ़ियाना ढंग तथा दुनिया की हक़ीक़त मिलकर एक ऐसा परिवेश रचते हैं कि पाठक-मन मगन हो उठता है। हिन्दी-उर्दू मिश्रित बातचीत की भाषा इन्हें सहज-सरल व बोधगम्य बनाती है।

- संपादक

अंजू केशव के दोहे

प्रतिरोध का भाव लिए हुए अंजू केशव के ये दोहे अपने समय की अनेक विसंगतियों को उजागर करते हैं। इन कुछ दोहों में ही विभिन्न समकालीन विमर्श पूरी मुखरता के साथ दर्ज हो रहे हैं। रचनाकार इन दोहों के माध्यम से हमारे समय की विकृत तथा संकीर्ण सोच पर करारी चोट करती हैं।

- संपादक

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन' के छप्पय छंद

ईर्ष्या घातक रोग, चाटता दीमक बनके।
कैसे बने सुयोग, सभी चलते हैं तन के।