Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
प्रियंका दुबे 'प्रबोधिनी' के छन्द

सरस्वती, सुभाषिनी विराजती सदा सुकंठ,
प्रार्थना करूं स्वरा स्वकंठ में समाइए।

डॉ० प्रीति अग्रवाल के दोहे

 
बालक मूरत प्रेम की, कोमल इनका भाव। 
झूठ-कपट जाने नहीं, सीधा मृदुल स्वभाव ।।

गीता गुप्ता 'मन' के सरोज सवैया छन्द


चंपई कत्थई बैंगनी मोगरी, लाल पीले गुलाबी हरे रंग होली में।
है अबीरों भरी प्रात की सुष्मिता शाम के रंग है दंग होली में।

कंचन पाठक के घनाक्षरी छन्द

ऐसे तके चितचोर भीग जाए पोर- पोर,
प्रेम में विभोर रूप उनका ललाम है।

नील में उजास घोल मिसरी के जैसे बोल,
क्षण - क्षण हिया हूक उठता अनाम है।