Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
शकुंतला अग्रवाल 'शकुन' के पर्यावरण विषयक दोहे

होकर व्याकुल प्यास से, बैठा पथिक उदास।
दूर  तलक  होता नहीं,  पानी का अनुभास।।

मनोज शुक्ल 'मनुज' के छन्द

त्याग की है नींव प्रेम,ज्ञान से भी श्रेष्ठ प्रेम,
प्रेम बांधता है देव, दनुज को नर को।
वासना से मुक्त प्रेम,जीव की है शक्ति प्रेम,
प्रेम दूर करता है, मन के भी डर को।

डॉ० नीता सुशील अग्रवाल के छन्द

 
संसद मंदिर में दिखे, लोकतंत्र प्रत्यक्ष।
राजनीति की ओट में, कटुता पक्ष विपक्ष।

प्रियंका दुबे 'प्रबोधिनी' के छन्द

सरस्वती, सुभाषिनी विराजती सदा सुकंठ,
प्रार्थना करूं स्वरा स्वकंठ में समाइए।