Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
डॉ० चन्द्रभान चन्द्र के घनाक्षरी छन्द

बुद्ध ने कहा है जो जरूरत से ज्यादा होता,
वही तो जहर बन मानव को मारता।
सत्ता धन भूख लोभ अभिमान बढ़ता तो,
धीरे-धीरे मानव चरित्र को है मारता।

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन' के पर्यावरण विषयक दोहे

होकर व्याकुल प्यास से, बैठा पथिक उदास।
दूर  तलक  होता नहीं,  पानी का अनुभास।।

मनोज शुक्ल 'मनुज' के छन्द

त्याग की है नींव प्रेम,ज्ञान से भी श्रेष्ठ प्रेम,
प्रेम बांधता है देव, दनुज को नर को।
वासना से मुक्त प्रेम,जीव की है शक्ति प्रेम,
प्रेम दूर करता है, मन के भी डर को।

डॉ० नीता सुशील अग्रवाल के छन्द

 
संसद मंदिर में दिखे, लोकतंत्र प्रत्यक्ष।
राजनीति की ओट में, कटुता पक्ष विपक्ष।