Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
डॉ० प्रीति अग्रवाल के दोहे

 
बालक मूरत प्रेम की, कोमल इनका भाव। 
झूठ-कपट जाने नहीं, सीधा मृदुल स्वभाव ।।

गीता गुप्ता 'मन' के सरोज सवैया छन्द


चंपई कत्थई बैंगनी मोगरी, लाल पीले गुलाबी हरे रंग होली में।
है अबीरों भरी प्रात की सुष्मिता शाम के रंग है दंग होली में।

कंचन पाठक के घनाक्षरी छन्द

ऐसे तके चितचोर भीग जाए पोर- पोर,
प्रेम में विभोर रूप उनका ललाम है।

नील में उजास घोल मिसरी के जैसे बोल,
क्षण - क्षण हिया हूक उठता अनाम है।

डॉ० भावना तिवारी के दोहे

पिया तुम्हारे देश में, नहीं प्रीति का मोल।
अमृत के पहले यहाँ, विष देते हैं घोल।।