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शकुंतला अग्रवाल 'शकुन' के छप्पय छंद

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन' के छप्पय छंद

ईर्ष्या घातक रोग, चाटता दीमक बनके।
कैसे बने सुयोग, सभी चलते हैं तन के।


1.

दीपक जला कुम्हार, चाक फेरे रोजाना।
खूब करे मनुहार, रमा जी निज-घर आना।
रूखा-सूखा भोग, ग्रहण कर लेना माता।
बने सुखद-संयोग, सदा तेरे गुण-गाता।
ऐसी करना माँ कृपा, हो जगमग दीपावली।
माँ तेरे आशीष से, खिलती खुशियों की कली।


2.

कर दौलत से प्यार, एक दिन सब पछ्ताते।
पाते कष्ट अपार, द्वार ईश्वर के जाते।
रोज करें विष-पान, तिजोरी में भर पैसे।
विपद पड़ी है आन, पार पाएँ अब कैसे?
मतलब का संसार यह, चलना सत की राह पे।
होते क्यों मगरूर तुम, जग की झूठी वाह पे।


3.

ईर्ष्या घातक रोग, चाटता दीमक बनके।
कैसे बने सुयोग, सभी चलते हैं तन के।
उर में लेता झाँक, जिंदगी उसकी झूमे।
मत दुनिया को हाँक, तभी सुख चौखट चूमे।
मन में उपजे खीझ जब, अपनों के व्यवहार से।
ऐसा बोना बीज तब, रिश्ते महके प्यार से।


4.

सुन लो हे! भगवान, नहीं भाती है दुनिया।
करके विष का पान, फूट कर रोती मुनिया।
मनुज बना हैवान, नोच लेता है बोटी।
राख हुए अरमान, दुबक के बैठी छोटी।
कभी कटे वो कोख में, कभी कोख कटती यहाँ।
भगवन! बतलाओ मुझे, सुता सुरक्षित है कहाँ?


5.

दुख में भी दे साथ, वही सच्चा है यारा।
थामे अपना हाथ, वही आँखों का तारा।
जिसके मन में दर्द, जगाती पीर-पराई।
अपने गम को भूल, उसी ने प्रीति लुटाई।
भगवन देते हैं उसे, अपना आशीर्वाद भी।
बिन बोले ही पूर्ण हो, उसकी तो फरियाद भी।


6.

एक अकेला दीप, चीर देता अँधियारा।
तम का अंत समीप, दिवा लाएँ उजियारा।
मत रख कोई आस, स्वार्थ के रिश्ते-नाते।
सब बन जाते खास, हाथ में दौलत आते।
फूँक-फूँक यदि पग रखो, मात न खाओगे कभी।
प्रेमिल- शीतल- छाँव भी, हर-दिन पाओगे तभी।


7.

जिस मन में भटकाव, वही खाता है ठोकर।
निशि-दिन खाता ताव, बुद्धि अपनी वो खोकर।
रिसने लगते घाव, मार काँटों की सह के।
होता नहीं भराव, 'शकुन' तन-मन भी दहके।
निर्णय लेता सख्त जो, पर्वत भी बौना लगे।
करे परिश्रम जो सदा, किस्मत उसकी ही जगे।

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रचनाकार परिचय

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन'

ईमेल : shakuntalaagrwal3@gmail.com

निवास : भीलवाड़ा (राज०)

जन्मतिथि- 17 मार्च, 1963
शिक्षा- स्नातकोत्तर
लेखन विधाएँ- लघुकथा, कहानी, एकांकी व छांदसिक रचनाएँ
प्रकाशन- 'दर्द की परछाइयाँ', 'बाकी रहे निशान', 'काँच के रिश्ते', 'शकुन सतसई' (दोहा संग्रह), 'भावों की उर्मियाँ' (कुंडलियाँ संग्रह),'लघुकथा कौमुदी' (लघुकथा संग्रह), 'यादों के तटबंध' (गीत संग्रह)
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित।
सम्मान- जिला साहित्यकार परिषद, भीलवाड़ा द्वारा 'साहित्य सुधाकर- 2018'
विक्रमाशिला हिंदी विद्यापीठ द्वारा 'विद्यावाचस्पति सम्मान- 2018'
द्वारकेश साहित्य परिषद, कांकरोली द्वारा सम्मानित- 2019
संपर्क- हनुमत कृपा, 10- बी-12, आर० सी० व्यास कॉलोनी, केशव हॉस्पिटल के पास, भीलवाड़ा (राज०)- 311001
मोबाइल- 9462654500