Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
हरेराम 'समीप' की कविताएँ

वे/ प्रेम से करते हैं घृणा/
और घृणा से करते हैं प्रेम

वे उगाना चाहते हैं/ अतीत
वर्तमान के खेतों में
और फ़सल काटना चाहते हैं/ भविष्य की

वीना श्रीवास्तव की कविताएं

ख़ून के बहते धार को रोकने में
हमारा भी रक्त रिसेगा निश्चित ही
वैसे भी
आधी दुनिया के रक्त रिसावी चक्र से ही
जन्मी है तुम्हारी दुनिया

प्रतिभा सुमन शर्मा की दो कविताएँ

कई बार मैं पत्थर हूँ और हूँ बेजान
यह सोचकर कइयों ने किया उपहास
कितनों ने तो उखाड़ फेंकने का यत्न किया
पर स्तंभ हूँ मैं
जड़ें बेहद रुंझी है मेरी

लता अग्रवाल 'तुलजा' की कविताएँ

साहित्य
आज चेतन मन का भाव नहीं
महज चमत्कृत शब्दों की
बुनावट बन कर रह गया है