Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
मनोज कर्ण की लघुकथाएँ

डगमगाती हुई नाव में भी कुल सोलह लोग सवार हो गए, क्षमता से दो गुना।
उफनती हुई नदी मे नाव के उतरते ही नाव सवार को केवल दो ही चीज दिखाई दे रही थी,सामने मौत और उस के पार बारात घर।

रेनुका चित्कारा की लघुकथाएँ

मधु ने गुस्से से भाई  को देखा और पूछा "क्यों कभी किसी ने भैया से नहीं बोला कि अपने चेहरे से चेचक के दागो को छिपाओ ... उनकी शादी तो हो गई आराम से उल्टा इकलौता होने के  कारण दहेज भी खूब मिला...

ऋचा पाठक की लघुकथाएँ

बगीचे के कोने में फूल-पत्तों की कतरनों और बाकी गंदगी के ढ़ेर पर उगा हुआ कुकुरमुत्ता आज सुबह से ही मुस्कुरा रहा था। हवा के झोंकों के साथ ऐसे हिल रहा था जैसे नाच रहा हो।

जानकी विष्ट वाही की लघुकथाएँ

जल्दी-जल्दी सरसतिया से दूर जाने की हड़बड़ी में सुहासिनी का पाँव जो मुड़ा तो दर्द से दोहरी हो वहीं गिर गई।