Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
सीमा सिंह की लघुकथाएँ

सीमा सिंह लघुकथा विधा की सिद्धहस्त रचनाकार हैं। सुगढ़ कहन के साथ इनकी लघुकथाओं का कथ्य बिलकुल ज़मीनी और हमारे आसपास का है। इनकी प्रस्तुत लघुकथाओं में देखा जा सकता है कि ये छोटी-छोटी कहानियाँ ऐसी हैं, जैसे हमारे आसपास की रोज़ घटित होती घटनाएँ। ऐसी घटनाएँ, जिन की ओर शायद ही हमारा अधिक ध्यान जाता हो। लेकिन रचनाकार की परिपक्वता ही है कि उन नियमित घटनाओं में भी वे ऐसे सबक़ हमारे सामने रखती हैं, जो जीवन जीने का एक सलीक़ा सौंप देते हैं हमें। मार्मिकता इनकी कथाओं का मज़बूत पक्ष है, तो सूक्ष्म अन्वेषण की क्षमता उनका आधार।

- के० पी० अनमोल

प्रेरणा गुप्ता की लघुकथाएँ

माँजी के करुण विलाप से सबका हृदय काँप उठा, “तेरी कही बात सच हो जाएगी बहू, सपने में भी न सोचा था। अब तो ज़िंदगी पर से मेरा भरोसा ही टूट गया।”
जैसे ही चार काँधे अर्थी को उठाने के लिए आगे बढ़े, वह चीख पड़ीं, “अरे, ये तो बताओ, कौन-से घाट लिए जा रहे हो बहू को?”

बेटे की आँखों से झर-झर आँसू बहने लगे, काँपती आवाज़ में बोला, “उसकी देह मेडिकल कॉलेज दान के लिए भेजी जा रही है, उसकी यही तो एक अंतिम इच्छा थी।”

सुजाता की लघुकथाएँ

अपने साथियों की दर्द भरी कहानी सुनकर हवा की आँखें भीग गयीं- मेरी अपनी दास्तान कुछ ऐसी ही है भाई!

सीमा सिंह की लघु कथाएँ

अपना निर्णय सुनाकर बाहर निकल कर, सामने ही खड़ी मन्नो के सिर पर हाथ फिराते हुए बोले, “अपने बाबा पर भरोसा रखना, तू उसी घर जाएगी जहाँ तेरी ज़रूरत हो। तेरे पिता के ऊँचे ओहदे, और दादा की दौलत की नहीं।”