Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
निशा भास्कर की लघुकथाएँ

खाने की प्लेट टेबल पर रख वह लैपटॉप के सामने आकर बैठ गई। खुली खिड़की के सामने अमलतास की घनी छायादार शाखाएँ लहरा रही थीं। अपने दांपत्य जीवन का शुभारंभ मैंने पति महेश के साथ इस पौधे को लगाकर किया था। आज यह विशाल वृक्ष बन गया है। किन्तु फूल...?

डॉ० पूनम पाठक 'चंद्रलेखा' की लघुकथाएँ

डॉ० पूनम पाठक की लघुकथाएँ हमारे समय की विसंगतियों-आडम्बरों की पहचान कर उनके खोखलेपन पर चोट करती हैं। उनकी प्रस्तुत लघुकथाओं में पूँजीवाद का शातिरपना, चमचमाते समाज के भीतर मानवीयता का ह्रास, कन्या के दान जैसी हास्यास्पद कुप्रथा का समुचित प्रतिरोध, बदलते समय में माँ के रिश्ते का सकारात्मक अनुकूलन तथा प्रेम की सामाजिक अस्वीकृति के बाद संबंधों में पनपते वैमनस्य को उजागर कर वे हमारी मानसिकता की उस जड़ता पर चोट करती हैं, जो सदियों में प्रचलन में होने के कारण मज़बूती से भीतर तक गढ़ चुकी है। साथ ही बदलाव की युक्तियाँ भी दिखाकर उन्हें अपनाने का आग्रह भी करती हैं।

- संपादक

सीमा सिंह की लघुकथाएँ

सीमा सिंह लघुकथा विधा की सिद्धहस्त रचनाकार हैं। सुगढ़ कहन के साथ इनकी लघुकथाओं का कथ्य बिलकुल ज़मीनी और हमारे आसपास का है। इनकी प्रस्तुत लघुकथाओं में देखा जा सकता है कि ये छोटी-छोटी कहानियाँ ऐसी हैं, जैसे हमारे आसपास की रोज़ घटित होती घटनाएँ। ऐसी घटनाएँ, जिन की ओर शायद ही हमारा अधिक ध्यान जाता हो। लेकिन रचनाकार की परिपक्वता ही है कि उन नियमित घटनाओं में भी वे ऐसे सबक़ हमारे सामने रखती हैं, जो जीवन जीने का एक सलीक़ा सौंप देते हैं हमें। मार्मिकता इनकी कथाओं का मज़बूत पक्ष है, तो सूक्ष्म अन्वेषण की क्षमता उनका आधार।

- के० पी० अनमोल

प्रेरणा गुप्ता की लघुकथाएँ

माँजी के करुण विलाप से सबका हृदय काँप उठा, “तेरी कही बात सच हो जाएगी बहू, सपने में भी न सोचा था। अब तो ज़िंदगी पर से मेरा भरोसा ही टूट गया।”
जैसे ही चार काँधे अर्थी को उठाने के लिए आगे बढ़े, वह चीख पड़ीं, “अरे, ये तो बताओ, कौन-से घाट लिए जा रहे हो बहू को?”

बेटे की आँखों से झर-झर आँसू बहने लगे, काँपती आवाज़ में बोला, “उसकी देह मेडिकल कॉलेज दान के लिए भेजी जा रही है, उसकी यही तो एक अंतिम इच्छा थी।”