Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
सविता मिश्रा 'अक्षजा' की लघुकथाएँ

"कल तक ख़ुश होती थी मैं रिश्तेदार निर्मला की किस्मत पर परन्तु आज रूबी की क़ामयाबी को देखकर मुझे उनसे इर्ष्या हो रही है। तनिक तेरे आगे-पीछे की ही तो है उसकी भी पैदाइश, ऊपर से ऐसी! देख, फिर भी वह मेहनत से पढ़कर कलेक्टर बन गयी और तू!"

विनय विक्रम सिंह की लघुकथाएँ

आज चूल्हे ने पाँच पनेथी ही दी थीं।  चूड़ियों ने दो पनेथी बड़ी थाली में डाल दीं, और एक-एक तीनों छोटी थालियों में। 

मनोज कर्ण की लघुकथाएँ

डगमगाती हुई नाव में भी कुल सोलह लोग सवार हो गए, क्षमता से दो गुना।
उफनती हुई नदी मे नाव के उतरते ही नाव सवार को केवल दो ही चीज दिखाई दे रही थी,सामने मौत और उस के पार बारात घर।

रेनुका चित्कारा की लघुकथाएँ

मधु ने गुस्से से भाई  को देखा और पूछा "क्यों कभी किसी ने भैया से नहीं बोला कि अपने चेहरे से चेचक के दागो को छिपाओ ... उनकी शादी तो हो गई आराम से उल्टा इकलौता होने के  कारण दहेज भी खूब मिला...