Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
सुजाता की लघुकथाएँ

अपने साथियों की दर्द भरी कहानी सुनकर हवा की आँखें भीग गयीं- मेरी अपनी दास्तान कुछ ऐसी ही है भाई!

सीमा सिंह की लघु कथाएँ

अपना निर्णय सुनाकर बाहर निकल कर, सामने ही खड़ी मन्नो के सिर पर हाथ फिराते हुए बोले, “अपने बाबा पर भरोसा रखना, तू उसी घर जाएगी जहाँ तेरी ज़रूरत हो। तेरे पिता के ऊँचे ओहदे, और दादा की दौलत की नहीं।”

राघव दुबे 'रघु' की लघुकथाएँ

"मेरा यह जीवन आपका दिया हुआ है, अब आप ही हमारे लिए माँ भी हो और पिताजी भी।" कहते हुए बेटा उनके कपड़े बदलने लगा था।

सविता मिश्रा 'अक्षजा' की लघुकथाएँ

"कल तक ख़ुश होती थी मैं रिश्तेदार निर्मला की किस्मत पर परन्तु आज रूबी की क़ामयाबी को देखकर मुझे उनसे इर्ष्या हो रही है। तनिक तेरे आगे-पीछे की ही तो है उसकी भी पैदाइश, ऊपर से ऐसी! देख, फिर भी वह मेहनत से पढ़कर कलेक्टर बन गयी और तू!"