Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
योगराज प्रभाकर की लघुकथाएँ

दरवाज़ा एकदम खुल गया है, वे दोनों बाहर आ गए हैं और मुझसे थोड़ी ही दूर खड़े हैं। मुझे लगा कि दोनों मुझे अजीब-सी नज़र से देख रहे हैं मैं सकपका-सा गया हूँ, कहीं इन्होने मेरी चोरी तो नहीं पकड़ ली है...