Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
वसंत जमशेदपुरी के गीत

अभाव तथा वंचना को गाढ़ी संवेदनाओं के साथ शब्द देते वसंत जमशेदपुरी के गीत एक सहृदय के मन को भीतर तक भेद देने की सामर्थ्य रखते हैं। आंचलिक अहसास अपने भीतर समेटे ये गीत हमारे आसपास के परिवेश को पूरी दृश्यात्मकता के साथ प्रस्तुत करते हैं।

जगदीश पंकज के नवगीत

नवगीत जैसी मुखर विधा के अग्रणी हस्ताक्षर जगदीश पंकज अपनी गीति रचनाओं में जिस महीनता से अपने समय, अपने परिवेश को बुनते हैं, वह दर्शनीय है। ये अपनी रचनाओं में अपने युग के शब्द-चित्र प्रस्तुत करते हैं। इनके यहाँ कथ्य जितना ज़रूरी है, शैली उतनी ही गंभीर। प्रस्तुत रचनाएँ हमारे ही मन की छटपटाहट का शाब्दिक अनुवाद हैं।

रूपम झा के नवगीत

युवा कवि रूपम झा नवगीत सहित कई विधाओं में समान हस्तक्षेप रखती हैं। रूपम झा के नवगीतों का कथ्य प्रभावशाली है, जो जनपक्षधरता के हित में बेबाक अभिव्यक्त होता है। वे सत्ता के मूल चरित्र को बिना किसी लाग-लपेट के न सिर्फ़ सीधा प्रस्तुत करती हैं बल्कि वाजिब सवाल भी करती हैं। कहना अनुचित न होगा कि इनके गीतों में सामाजिक विसंगतियों की सहज एवं प्रभावी अभिव्यक्ति है। इनके गीतों में स्त्री साहसी है, प्रतिरोधी है , क्रान्तिकारी चेतना से लैस है।रूपम की वैचारिक ज़मीन निश्चित ही उर्वर है।

- अनामिका सिंह

मयंक श्रीवास्तव के नवगीत

अल्हड़पन लेकर पछुआ का
घिर आयीं निर्दयी घटाएँ
दूर -दूर तक फैल गयी हैं
घाटी की सुरमई जटाएँ
ऐसे मदमाते मौसम में
जाने कौन-कौन तरसेंगे