Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
निशा राय के गीत

कठिन निर्णय कई हृद के द्वार की साँकल बजाते
किंतु ममता से बँधे ये पाँव दुविधा में फँसे थे।
मैं तुम्हारे साथ चलने के लिए तत्पर खड़ी थी
किंतु गौतम तुम दबे पाँवों से आगे बढ़ चले थे।

वीणा चंदन के गीत

आए दिन उत्सव के
गीत के गुंजार के

कुछ सपने स्नेेहिल
छाँह छाँह पलते हैं
कुछ मरुथल रातों में
बूँद बूँद गलते हैं

झरते अंजुरियों में
फूल हरसिंगार के

सीमा अग्रवाल के गीत

यहाँ कोई किसे
समझा सकेगा
सभी हैं शून्य
सब ही सैकड़े हैं।

नेहा वैद्य के गीत

फिर पुराने पृष्ठ पलटे
समय ने चुपचाप उलटे
ले वही पुस्तक वही शब्दावली।
ज़िन्दगी आगे बढ़ी, आगे चली।।