Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
शीतल बाजपेयी के गीत

सूर्य डूबता नहीं कभी भी, धरा अक्ष पर घूमा करती।
दृष्टिकोण उत्कृष्ट बने तो मंज़िल पग को चूमा करती।
हार नही मानी है मैने, ना मरते दम तक मानूँगी।
जितना दुर्व्यवहार करोगे उतनी ही मजबूत बनूँगी।

संध्या सिंह के गीत

लिखूँ मोर की
कलगी पर मैं
घने घने कजरारे बादल
सहमी हिरनी के
पैरों मे
लिखूँ कुलाँचे जंगल-जंगल

पिंजरे के
तोता मैना को
पंखों का विस्तार लिखूँगी

सीमा अग्रवाल के गीत

ओढ़े अबीर पहने गुलाल
फगुआ की धुन पर
नाच रही
बगिया बगिया।

आराधना शुक्ला के गीत

वे मुस्कानों के प्यालों में
ग़म का शर्बत पीने वाले
जीवन को ठोकर दे-देकर
जीभर जीवन जीने वाले
वे दुविधाओं के धागों से
सुविधाओं का बाना बुनते
वे जो काँटों की सुइयों से
घावों का मुख सीने वाले
वे जो सागर को उबालकर
बादल में पानी भरते हैं
उन्हीं अग्निधारी सुमनों को
मौसम का हर ढंग मुबारक
दुनिया तुझको रंग मुबारक