Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
नीता अवस्थी की बाल कुण्डलिया 

सच्चे बालक हम सभी, नहीं बोलते झूठ।
सदा सत्य ही बोलते, चाहे  जाओ  रूठ।।
 
 चाहे जाओ  रूठ, लौटकर फिर आओगे।
सच का दर्पण देख, बाद में पछताओगे।।
 
मन के कोमल भाव, उमर के हैं हम कच्चे।
मगर इरादे नेक, हृदय के बिल्कुल सच्चे।।

डॉ० प्रदीप अवस्थी के बालगीत

पौधा माँ के नाम लगायें
धरती माँ को हरा बनायें

जीवन का माँ पोषण करती
बच्चों के कष्टों को हरती

नीता अवस्थी के बाल गीत

छोटे-छोटे हाथ मगर हम,
बीज खुशी के रोपेगें।
रोड़ा अगर बीच में आया,
उसे काटकर फेकेगें।।

शालिनी सिन्हा की बाल कहानी 'सच हुआ सपना'

रूई की फाहों सी गिरती सफ़ेद बर्फ़ ने सारे घरों को ढक लिया था। सड़कें, मकान की छतें, पेड़ पौधे जैसे सब सफ़ेद चादर ओढ़े हुए थे, प्रकृति के पास मानो और कोई रंग ही ना बचा हो! ये दृश्य देख कर घर की खिड़की से झाँकती याना की आँखों से भी जैसे सब रंग ग़ायब हो गए थे।