Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
डॉ० ऋतु शर्मा नंनन पाण्डेय की बाल कहानी- फिबी और बेला

जब से फिबी अपनी सहेली किम के घर से वापिस आई थी ,वह सारा समय किम के ख़रगोश बनि के बारे में ही बात किये जा रही थी। आने वाले सप्ताह मे फिबी का जन्मदिन भी था। उसने माँ से कहा उसे भी अपने जन्मदिन पर एक ख़रगोश चाहिए। माँ ने फ़ीजी से पूछा तुम्हें ख़रगोश ही चाहिए? तुम कुछ और अपने जन्मदिन पर माँग सकती हो जैसे-  नई साइकिल, डॉल हाऊस या कुछ और?

अनुभव राज के बाल गीत

मैं ज़िद्दी हूँ तूफानों में
दीप जलाना चाहूँ
पंख हैं कोमल फिर भी नभ में
मैं तो उड़ना चाहूँ
डिगूँ न पथ से मुश्किल को ये
कहते कहते रहना है
मुझको बहना हरदम बहना
बहते बहते रहना है।

चक्रधर शुक्ल की बाल कविताएँ

चक्रधर शुक्ल साहित्य के उत्थान लिए निरंतर क्रियाशील हैं । कानपुर में जितनी भी साहित्यिक गतिविधियाँ होती हैं उनके केन्द्रबिन्दु में आपका होना अनिवार्य है। आप श्रेष्ठ क्षणिकाकार, व्यंगकार होने के साथ ही बाल साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास करते रहते हैं। 

जब जागो, तब सवेरा- प्रियंका गुप्ता

शिक्षा का हर व्यक्ति के जीवन में कितना महत्व है इस को कहानी के माध्यम से बड़ी ही सुंदरता से रचा है सुप्रसिद्ध कहानीकार एवं बाल साहिरीकार प्रियंका गुप्ता। कहानी बेहद दिलचस्प है। एक लड़की, माँ बाप की पिछड़ी सोच के चलते शिक्षा से वंचित कर दिए जाने के पश्चात भी किस प्रकार पढ़ने के रास्ते निकालती है" यह जाने के लिए आप भी पढिए 'जब जागो, तब सवेरा'।