Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
प्रगति गुप्ता के उपन्यास 'पूर्णविराम से पहले' की सत्रहवीं कड़ी

विवाह के बाद के इतने सालों में शिखा ने पहली बार समीर को इतने क्रोध में देखा। उनके बोलने से लग रहा था कि जल्द से जल्द बहू-बेटे घर से चले जाएँ।सार्थक के ऐसा क़दम उठाने से समीर बहुत आहत हुए थे।

डॉ० उपमा शर्मा के उपन्यास 'अनहद' की तीसरी कड़ी

"इसे देव के कमरे में पहुँचा देना। अगर यह कुछ सामान लाई हो तो वो भी वहीं रखवा देना। न लाई हो तो जब यह उठ जाए, इससे पूछ इसकी ज़रूरत का सामान किसी को भेज या तुम ख़ुद जाकर बाज़ार से ले आना। ये अब से यहीं रहेगी।"

प्रगति गुप्ता के उपन्यास 'पूर्णविराम से पहले' की सोलहवीं कड़ी

सार्थक शिखा के पास आकर बैठ गया तो शिखा बोली थी- सार्थक, ख़ुश रहो बेटा। तुम्हारे पापा और मेरे विचार इस विषय में एक ही हैं। ख़ैर अब छोड़ो। अपने कमरे में जाकर रेस्ट करो। तुम्हें कल निकलना भी है। अपना सब सामान देख लेना बेटा। नई नौकरी में जल्दी आना नहीं होगा। मेरी कहीं ज़रूरत हो तो बता देना। मदद को आ जाऊँगी।

डॉ० उपमा शर्मा के उपन्यास 'अनहद' की दूसरी कड़ी

अनन्ता धीरे-से उठकर बाहर चली गई। परेशान वो भी थी। उलझन का कोई सिरा ढूँढे से हाथ नहीं आ रहा था। क्या हुआ मम्मी-पापा के बीच? कहाँ गये पापा? क्या कोई झगड़ा हुआ? पर किस बात को लेकर? कोई तीसरा उनके बीच आ गया? पर कौन? क्या मम्मी सच में पापा के बारे में अब कुछ नहीं जानतीं?