Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
प्रगति गुप्ता के उपन्यास 'पूर्णविराम से पहले' की बारहवीं कड़ी

शिखा की बातें सुनकर प्रखर उस रोज़ कितनी ज़ोर से हँसा था। उसकी निश्चल और मासूम हँसी को सुनकर शिखा में घबराहट व उत्सुकता एक साथ जाग्रत हो उठी थी।

प्रगति गुप्ता के उपन्यास 'पूर्णविराम से पहले' की ग्यारहवीं कड़ी

आज शिखा को समीर से जुड़े अनूठे प्यार का अनुभव हुआ। उसे लगा कि काश यह सब समीर ने थोड़ा-सा भी उसे महसूस करवाया होता तो ज़िंदगी और भी ख़ूबसूरत हो जाती।

प्रगति गुप्ता के उपन्यास 'पूर्णविराम से पहले' की दसवीं कड़ी

फिर अचानक धीरे-धीरे प्रीति को दर्द में आराम आना शुरू हुआ और उसकी साँसे धीरे-धीरे करके ठंडी पड़ती गई। जाने से पहले प्रीति ने मेरा एक हाथ कसकर पकड़ लिया था। जैसे ही प्रीति ने विदा ली, उसका हाथ मेरे हाथ से छूटकर बिस्तर पर गिर पड़ा। हम दोनों चुपचाप लाचार खड़े हुए उसको जाता हुआ देखते रहे।

प्रगति गुप्ता के उपन्यास 'पूर्णविराम से पहले' की नवमीं कड़ी

स्त्रियाँ जब अपने किसी प्रिय की बाट जोहती हैं तो कितना प्रेम स्वयं में सँजोकर विशाल क़द की हो जाती हैं। इस भाव को महसूस करने वाले का क़द भी तभी विशाल होता है, जब उसे किसी का किया हुआ महसूस हो। शिखा ने ज्यूँ ही समीर की आँखों में देखा, उसे समीर की अनकही समझ आ गई। प्रखर के अपनी बात पुनः शुरू करने से दोनों उसे सुनने लगे।