Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
प्रगति गुप्ता के उपन्यास 'पूर्णविराम से पहले' की इक्कीसवीं कड़ी

शिखा की बात सुनकर दोनों देवर भावुक हो उठे। जब दोनों ने बहू के बारे में पुनः पूछा तो शिखा ने चुप्पी साध ली, क्योंकि इस बात का उसके पास कोई जवाब नहीं था। आजकल कोई भी कितना क़रीबी ही क्यों न हो, बहुत प्रश्न नहीं पूछता। सच तो यह भी है कि कोई ज़्यादा जवाब नहीं देना चाहता। आज आत्मीयता भी औपचारिकताओं को ओढ़कर आती है।

डॉ० उपमा शर्मा के उपन्यास 'अनहद' की सातवीं कड़ी

सच वो देव के बिना कहाँ रह पाती थी? पर कैसे समझाये इन सबको कि देव गये कहाँ हैं? यहीं हैं पल-पल उसी के साथ। न जाने कब वापस आ जाएँ। वो नहीं मिली घर में तो कहाँ तलाशेंगे? वापस चले गये फिर से तो। उसे देव का इंतज़ार करना ही होगा। फिर कैसे जा सकती है वो इस घर से, जो उसके और देव के प्यार का मन्दिर है।

प्रगति गुप्ता के उपन्यास 'पूर्णविराम से पहले' की बीसवीं कड़ी

जीवन की दौड़ में साथ चलते लोग, विश्राम घाट पर पहुँचते ही स्मृतियों में बदलने लगते हैं।

डॉ० उपमा शर्मा के उपन्यास 'अनहद' की छठवीं कड़ी

योग का मतलब ही है, मन की शांति और योग से क्या होता है? स्वयं की जागृति। संगीत भी साधना है। योग भी साधना है। और यही नाद योग की उपलब्धि है देव।