Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
अनुज पाण्डेय के गीत

टूटी थी पतवार कि
कैसे इतनी जल्दी छोर पकड़ते?
कैसे सबकुछ छोड़
इश्क़ की इक पतंग की डोर पकड़ते
हम समाज के धुर निर्धन थे
धन में बस दो-चार सपन थे
सपने बेच इश्क़ ले आते
उर इतना भी अभय नहीं था

अमित पाण्डेय की ग़ज़लें

 
कोई भी काम छोटा या फिर बड़ा नहीं है 
पाना है कुछ तो दिल से दुनिया निकाल पहले 

सपना चंद्रा की काविताएँ

दिन के उजाले से
सारी रश्मियों को
भरकर अपने भीतर
समेटे हुए
वह भूल गई
कि उसे खो जाना है

अनामिका प्रिय की कहानी- नायक

अगर ईश्वर पर भरोसा है तो ठीक है। वैसे किसी व्यक्ति पर एक बार तो भरोसा किया ही जा सकता है और क्या मैं इस काबिल नहीं हूँ।  मुझे तुम्हारे जवाब का इंतजार रहेगा। बहुत परेशान सी हो गयी थी वह। कहा था-  हद है, तुम कुछ नहीं समझते। प्लीज यह सब अब दुबारा मत कहना।