Ira Web Patrika
जुलाई-सितंबर 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
डॉ० मीनू अग्रवाल की कविताएं

चेहरे पर उभरी ये नक़्काशी
ही तो करती है बखान 
चरित्र की महिमा का  
और उनके मध्य उठती
स्निग्घ मुस्कान की सरल रेखा
अदा कर रही है शुक्रिया 
प्रकृति की हज़ार नेमतों का भी!!

ऋत्विक रंग की दो ग़ज़लें

हर कोई पूछता है सबब इस उदासी का
किससे कहें कि तेरे लिए हम उदास हैं

शिखरानी की कविताएँ

बाँहों में बाँहों का बंधन
कुछ इस तरह बँध जाए
जैसे मोती और धागा
मिलकर हो जाते माला

आशना सोनी की कविताएँ

बस मैं अब और नहीं सह सकती
आख़िर किसी से कुछ नहीं कह सकती
अक्सर सहम जाती हूँ
समाज के कचोटते सवालों से
चुभती निगाहों से