Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
आशना सोनी की कविताएँ

बस मैं अब और नहीं सह सकती
आख़िर किसी से कुछ नहीं कह सकती
अक्सर सहम जाती हूँ
समाज के कचोटते सवालों से
चुभती निगाहों से

प्रतिभा सुमन शर्मा की कविताएँ

उठती हूँ तो बोले, उठी क्यों?
बैठती हूँ तो बोले, बैठी क्यों?
भागती हूँ तो बोले, ऐ मत भागो!
लेटी हूँ तो बोले क्या दिन भर लेटी रहोगी?
कपड़े ठीक से पहनो
मुँह पर थोड़ा पावडर लगाया करो
माथे पर लाल रंग की ही बिंदी लगाया करो