Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
विनीत मोहन औदिच्य की क्षणिकाएँ

धर्म की तुला में संरक्षित 
नित्य प्रति दिन
आक्टोपस सा 
चारों ओर विस्तार पाता 
जनसंख्या का घनत्व
मुँह चिढ़ा रहा है
विकास को 

महिमा श्रीवास्तव वर्मा की क्षणिकाएँ

तुमने चुरा कर दिया था 
एक टुकड़ा 
फूल-सी ज़िंदगी का
वरना हमने तो 
अब तक 
काँटो भरी 
ज़िंदगी को ही जिया था

डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर' की क्षणिकाएँ

बहुत देर से
ठहरा हुआ हूँ
इनबाॅक्स में,
शायद तुम लिखोगी कुछ 
या फिर भेजोगी कोई इमोजी,
मौन टूटता ही नहीं,
तुम भी सोच रही होगी 
मुझे ही,
जानता हूँ।

डॉ. मिथिलेश दीक्षित की क्षणिकाएँ

चेहरे बिकाऊ थे कभी
अब तो मुखौटे बिक रहे हैं,
साफ़-सुथरे दिख रहे हैं।