Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
ज्योत्स्ना शर्मा 'प्रदीप' की क्षणिकाएँ

हाँ! मुझे रश्क
होता है,
जब तुम्हारी आँखों में
किसी के
नाम का एक
अनबहा
अश्क होता है।

नमिता सिंह 'आराधना' की क्षणिकाएँ

 
दोनों एक दूसरे की बाहों में थे 
स्त्री प्रेम में डूबी हुई 
और पुरुष देह की गंध में। 

कंचन अपराजिता की क्षणिकाएँ

कई रिश्ते
पारे जैसे होते हैं 
बिखर गये
फिर कहाँ सिमटे
बिछड़ गये!

शैलेष गुप्त 'वीर' की क्षणिकाएँ

शैलेष गुप्त 'वीर' लब्ध प्रतिष्ठ क्षणिकाकार हैं। आपने हिन्दी साहित्य में बड़ा काम किया है। हिन्दी भाषा के संवर्धन हेतु आप निरंतर प्रयत्नशील हैं। आपकी रचनाओं का कई भाषाओं में अनुवाद भी होता रहता है।