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पवन कुमार जैन के हाइकु

पवन कुमार जैन के हाइकु

नभ में शोर
चल रहा हो जैसे
संसद सत्र।

करते विदा
आषाढ में बूँदों को
रो-रो के मेघ।

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धोती में बँधा
तुड़ा-मुड़ा रुपैय्या
माँ की तिजोरी।

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अम्मा ने जीती
बच्चों से हर बाज़ी
हार-हार के।

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सुर में सुर
मिला रहे दादुर
वीणा-नूपुर।

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बूढा दरख़्त
सिर पे लादे हुए
गुज़रा वक्त।

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सुस्ताने बैठे
थके-थके बादल
वर्षा के बाद।

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अधूरे ख़त
बंद अलमारी में
सिसक रहे।

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नभ में शोर
चल रहा हो जैसे
संसद सत्र।

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चंदा ने सौंपी
सारे घर की चाभी
चन्द्रयान को।

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नाज़ुक कंधे
लादे फिरते रोज
ज्ञान का बोझ।

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रचनाकार परिचय

पवन कुमार जैन

ईमेल : jain.pawankumar@gmail.com

निवास : लखनऊ (उ०प्र०)

जन्मतिथि- 05 जुलाई, 1959
शिक्षा- स्नातकोत्तर (हिंदी साहित्य)
संप्रति- पंजाब एण्ड सिंध बैंक से वरिष्ठ प्रबंधक (राजभाषा) के पद से सेवानिवृत्त।
प्रकाशन- 'हाय अंकल बाय आँटी' (व्यंग्य संग्रह), 'पाँच-सात-पाँच' (हाइकु संग्रह) प्रकाशित।
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख, कविताएँ, कहानियाँ, हास्य-व्यंग्य एवं हाइकु का प्रकाशन।
संपादन- बैंक की गृह पत्रिका 'राजभाषा अंकुर' और बैंक नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, लखनऊ की पत्रिका 'नगर-प्रभा' का सम्पादन। राजभाषा स्वर्ण जयंती पत्रिका का सम्पादन, जो वर्ष 2000 में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा पुरस्कृत हुई। 'लखनऊ के हाइकुकार' (2008) एवं 'हाइकु लैब- स्वप्नों की सेल्फी' का सम्पादन।
अन्य गतिविधियाँ- अखिल भारतीय स्तर पर कवि सम्मेलनों का आयोजन, संचालन एवं प्रस्तुति। वर्ष 2012 से 'हाइकु संसार' समूह का संचालन। बैंकों और केन्द्रीय सरकार के अनेक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में संकाय-सदस्य। आकाशवाणी और दूरदर्शन के साहित्यिक कार्यक्रमों में नियमित प्रतिभाग।
सम्मान/पुरस्कार- विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत।
निवास- बी-1/504, कावेरी अपार्टमेंट, गोमतीनगर विस्तार, लखनऊ (उ०प्र०)- 226010
मोबाइल- 9867606954